बुधवार, 11 नवंबर 2009

बिभाग मेरी नज़र में

सोचता हूँ दो वर्षो में क्या खोया क्या पाया,

बिभाग का आशीष पाया, मन का विनीत खोया

कभी मन पाएल की झंकार कर हँसता है ,

कभी मृग मन कस्तूरी की खोज में तडपता है ,

कभी लगता है की मुरली की मधुर तान कान में रस घोलती है ,

तो कभी गुरूजी की क्रोध मन पट पर अमित छाप छोड़ती है ,

बिभाग में रीती नीति की बात करना बेमानी है ,

आकांक्षा की दरिया में बहते रहने की ही कहानी है ,

जीवन का संगीत छोड़ अब संगीता भी घर चली,

आलोकित करने को आतुर अलोक भी कही दूर चला ,

श्री अपने स्नेह मुख से सब पर प्रेम की shrabani वर्षा करती है ,

रघु कुल के राघव की तो बात निराली ,

जीवन के अरुण को केसव बन सबको बतलाते ,

सत्य के वेदी पर अंकित दो शब्द लव और desire हम सबको डराती है ,

सास्वत शिला खंडो से हेम पिघलती जाती है ,

दो बर्षो की तपस्या से भी अभी शिल्प ज्ञान का आभाव ,

रेपोर्टिंग रईटिंग का तो बहुत बुरा हाल है,

राजनाथ से प्राथना है सबका दिल आज़म करे

सबके दिलों के भीतर प्रेम की शमा जलाये

बहुत हो गई विभाग चालीसा अब तो भइया सबको सायो नारा ।



4 टिप्‍पणियां:

  1. i must extend my heartiest congratulations to u dhiraj!!!!!this creation of yours is simply amazing!!!m running out of words to describe the uniqueness of this poem...just too good...way to go buddy...
    ekdum maza aa gaya :)

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  2. BRAVO DHIRAJ


    we must congratulate dhiraj with all our heart for producing such a gem of the creative creation. it appears a work of a pure aesthete. how diligently and how meticulously the official 'think tank'( i hereby propose that dhiraj should be known by this epithet) of our class has laid out the golden plate of emotions with full of carefully prepared luscious and and mouth-watering dishes in the form of the characteristic and literary descriptions(of differernt individuals frm our batch)! bravo..............dhiraj..............bravo.............

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  3. yup..i too agree with payel n ankit...i am glad 2 see this creative bent of dhiraj...cheers buddy!!! this poem shall be an asset to us as it beautifully reflects all the members of this family...Thank u dear n keep ur spirits high in this struggling life!

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  4. exceptional creation!

    i was unacquainted with this side of Dhiraj...
    After going thru dis post, i must say that u have become a tough competitor for Vineet ( in reference to poems and gazals)...
    you have done a great job with powerful intertwining of words..

    congrats dhiraj!

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